Sunday, 13 November 2016

बैंकों में पुरानी मुद्रा के रूप में जमा राशि पर आयकर विभाग द्वारा लिए गए फैसलों से संबंधित सवालों पर वित्त सचिव डॉ. हसमुख अधिया द्वारा दिए गए कुछ जवाब

सवाल 1: बहुत सारे छोटे व्यापारियोंगृहिणियोंकारीगरोंकामगारों के पास बचत के रूप में कुछ नकद राशि घरों में रखे हो सकते हैंक्या अगर उसे बैंक में जमा कराने जाने पर आयकर विभाग पैसों को लेकर पूछताछ करेगा।
जवाब 1: सवाल में दिए गए वर्ग के लोग जो 1.5 या 2 लाख रुपये जमा कराने के लिए जाते हैं उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं हैक्योंकि ये आयकर की न्यूनतम सीमा के भीतर है। इस तरह की छोटी जमा राशि के लिए आयकर विभाग किसी को भी परेशान नहीं करेगा।
सवाल 2: क्या इस दौरान जमा की गई नकद रकम की रिपोर्ट आयकर विभाग लेगा। अगर हांतो क्या 10 लाख नकदी जमा की सीमा को पार करने पर सूचित करने का वर्तमान नियम आगे भी जारी रहेगी।
जवाब 2: हम 10 नवंबर से 30 दिसंबर के बीच जमा कराई जाने वाली 2.5 लाख से ऊपर की हर नकदी रकम का और ऐसे खाते का हिसाब लेंगे। विभाग इस रकम और इसे जमा कराने वाले व्यक्ति द्वारा फाइल की गई आयकर रिटर्न का मिलान कर जांच करेगा। उसके बाद उसपर उचित कार्रवाई की जा सकती है।
सवाल 3: मान लीजिए की विभाग को ये पता चलता है कि किसी खाते में 10 लाख से ज्यादा की रकम जमा की गई है और वो रकम जमाकर्ता की घोषित आय से मेल नहीं खा रही है। ऐसे में जमाकर्ता पर कितना कर और जुर्माना लगाया जाएगा।
जवाब 3: इस तरह के मामलों को कर चोरी माना जाएगा। इन मामलों में आयकर अधिनियम की धारा 270 (ए) के हिसाब से कर की राशि वसूली जाएगी और साथ ही भुगतेय कर के अलावा 200% की राशि जुर्माना के रूप में भी वसूली जाएगी।
सवाल 4: ऐसा माना जा रहा है कि बहुत सारे लोग अब आभूषण खरीद रहे हैंइससे निबटने के लिए विभाग किस तरह से तैयारी कर रहा है?
जवाब 4: जो भी व्यक्ति आभूषण खरीदता है उसे पैन नंबर देना होता है। हम क्षेत्रिय प्राधिकारियों को ये निर्देश जारी कर रहे हैं कि ये सुनिश्चित की जाए कि सभी  आभूषण विक्रेता इस नियम का पालन करने में किसी तरह का समझौता ना हो पाए। उन आभूषण विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी जो आभूषण बिक्री के समय पैन नंबर नहीं लेते हैं। जब आभूषण बिक्री के बाद विक्रेता द्वारा नकद राशि जमा कराई जाएगी तब इसकी जांच की जाएगी कि वो बेचे गए आभूषण की रकम से मेल खाते हैं या नहीं। बिक्रेता ने ग्राहक का पैन नंबर लिया है या नहीं इसकी भी जांच की जाएगी।
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पीकेटी/एमएस- 4988

Tuesday, 16 August 2016

मुख्यमंत्री का राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में सम्बोधन सशक्त, समृद्ध और खुशहाल राजस्थान के निर्माण में भागीदारी के आह्वान के साथ विकास की कई घोषणाएं

जयपुर, 15 अगस्त। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने अजमेर के पटेल मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में देश के शहीदों एवं स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हुए सशक्तसमृद्ध और खुशहाल राजस्थान के निर्माण में युवा शक्ति एवं प्रदेशवासियों से भागीदार बनने का आह्वान किया। श्रीमती राजे ने कहा कि आज देश में युवाओं की संख्या65 प्रतिशत है। हमें जोश और जज्बे को बरकरार रखते हुए आजादी के मूल मंत्र को हमेशा याद रखना होगा। 



2 अक्टूबर से लगेंगे पंचायत शिविर        

  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पहली बार पंचायत से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए पंचायत स्तर पर ही शिविर लगाकर जन समस्याओं के निराकरण की अभिनव पहल की जाएगी। पूरे प्रदेश में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर के अवसर पर ये शिविर शुरू होंगे।

    किसानों को 1500 करोड़ का अतिरिक्त ब्याज मुक्त फसली ऋण

   मुख्यमंत्री ने कहा कि फसली ऋण योजना के तहत किसानों को सहकारी बैंकों के माध्यम से 1500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त ब्याज मुक्त फसली ऋण उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने समारोह में इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि किसानों की 5 हैक्टेयर तक की खातेदारी भूमि से जिप्सम की परत हटाने का परमिट अब जिला कलक्टर के स्तर पर ही जारी कर दिए जाएंगे। इससे भूमि की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों को भरपूर लाभ मिलेगा। 

40 हजार महिलाओं को आजीविका तथा मनरेगा से जोड़ेंगे        
  मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए उन्हें आजीविका से जोड़ा जाएगा। इस साल हम 40 हजार ऎसी महिलाओं को राजस्थान आजीविका परियोजना तथा मनरेगा से जोड़ेंगेजिससे ये महिलाएं न केवल अपने खेतों में खेत-तलाईभूमि समतलीकरण और मेड़बंदी का कार्य करा सकेंगी बल्कि वर्मी-कम्पोस्ट के उत्पादन के साथ-साथ बकरी और पशु के लिए शैड का निर्माण भी कर सकेंगी।
एससी-एसटी को पात्रता अंकों में 5 प्रतिशत की छूट          
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य मेें मंत्रालयिक सेवा संबंधी तीनों नियमों जैसे राजस्थान सचिवालय, राजस्थान लोक सेवा आयोग एवं राजस्थान अधीनस्थ कार्यालय लिपिकवर्गीय सेवा नियम, 1999 में नया प्रावधान किया जाएगा। इनमें सीधी भर्ती के पदों पर एससी-एसटी के अभ्यर्थियों को प्रथम चरण व द्वितीय चरण की परीक्षा में न्यूनतम पात्रता अंकों में 5 प्रतिशत तक की छूट देय होगी। इससे अधिक लोगों को आरक्षित पदों पर चयन का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सुविधा के लिए ऑनलाइन पेंशन सॉफ्टवेयर को शीघ्र ही लागू किया जाएगा।
विद्यार्थी मित्रों को राहत के लिए करेंगे सार्थक पहल       
   श्रीमती राजे ने कहा कि लम्बे समय से विद्यार्थी मित्र की समस्या के समाधान करने की मांग की जा रही है। हमने इसके समाधान का प्रयास भी किया परन्तु समस्त प्रक्रिया न्यायालय में विचाराधीन होने से लंबित है। अब नए सिरे से इसके समाधान का प्रयास किया जा रहा है। आगामी एक-दो माह में  इस दिशा में सार्थक पहल करने का प्रयास किया जा रहा है। 
  350 स्कूलों में होेंगे 204 करोड़ के काम          
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से पिछले ढाई सालों में शिक्षा की गुणवत्ता में निरन्तर सुधार हुआ है। इसी का परिणाम है कि वर्ष 2013 की तुलना में वर्ष 2016 में रिजल्ट 56 से बढ़कर 70 प्रतिशत हो गया है। बारहवीं विज्ञान संकाय का रिजल्ट 34 से बढ़कर 47 प्रतिशत हो गया है तथा लाख बच्चों का नामांकन बढ़ा हैजो एक रिकॉर्ड है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अन्तर्गत 204करोड़ रुपये की लागत से 350 विद्यालयों में हजार से अधिक कार्य कराये जाएंगे। इनमें विज्ञान प्रयोगशालाकम्प्यूटर रूमआर्ट एण्ड क्राफ्ट रूमपुस्तकालयअतिरिक्त कक्षा-कक्ष एवं पेयजल सुविधाओं के कार्य होंगे।
  शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए 12 केन्द्र          
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों के आधुनिक प्रशिक्षण के लिए 9 शैक्षणिक संभाग मुख्यालय सहित 12 स्थानों पर स्थित स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ एजूकेशन मैनेजमेंट एण्ड ट्रेनिंग में अत्याधुनिक आईटी सुविधाओं से युक्त केन्द्राें का निर्माण कराया जाएगा। 
संभाग मुख्यालयों पर स्थापित होंगे ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर     
     श्रीमती राजे ने युवाओं को कौशल विकास से जोड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि हमने इस दिशा में ठोस कदम उठाये और राजस्थान मिशन ऑन लाइवलीहुड का पुनर्गठन किया। आज प्रदेश के सैकेण्डरी स्कूलों में भी व्यावसायिक शिक्षा प्रदान की जा रही है। राज्य का ऎसा कोई जिला नहीं है, जहां किसी बड़ी कम्पनी की आईटीआई से पार्टनरशिप न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले दो-तीन माह में सीकर और रेलमगरा के साथ-साथ सभी संभाग मुख्यालयों पर ड्राइविंग ट्रेनिंग सेन्टर स्थापित किए जाएंगे। नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एन्टरप्रेन्योरशिप एण्ड स्मॉल बिजनेस डवलपमेंट की इकाइयां प्रदेश की सभी सरकारी आईटीआई में 13 दिसम्बर तक स्थापित कर दी जाएंगी। राज्य में कौशल प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में अगस्त माह के दौरान करीब 21 हजार प्रशिक्षणार्थी नामांकित थे, जो कि एक रिकॉर्ड है। साथ ही सरकार ने अब तक सरकारी एवं गैर सरकारी क्षेत्रों में 9 लाख 90 हजार रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए हैं। 104 या 108 डायल करने पर मिलेगी एम्बूलेंस सेवाएं      
   मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में 108 एम्बूलेंस सेवा, 104 जननी एक्सप्रेस सेवा, बेस एम्बूलेंस सेवा तथा 104 चिकित्सा परामर्श सेवा पृथक्-पृथक् संचालित की जा रही हैं और इनकी सेवाओं के लिए कॉलर को अलग-अलग नम्बर डायल करने पड़ते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए इन चारों एम्बूलेंस सेवाओं को एकीकृत कर जीवनवाहिनी इंटीग्रेटेड एम्बूलेंस योजना शुरू की जाएगी। जिससे 104 या 108 डायल करने पर एम्बूलेंस उपलब्ध होगी। इसका फायदा यह होगा कि रेस्पोंस समय में कमी आने से मरीज तक जल्दी पहुंचा जा सकेगा। इस प्रणाली को आज से ही लागू किया जा रहा है। 
  295 आदर्श पीएचसी की शुरूआत       
   मुख्यमंत्री श्रीमती राजे ने इस अवसर पर 295 आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की शुरूआत करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह योजना महत्वपूर्ण है। वर्ष 2017 तक हम 900 पीएचसी को आदर्श बनाएंगे। इनमें एलोपैथिक, आयुर्वेद और योगा की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि चिकित्सालयों में अनुपयोगी पड़े उपकरणों की शीघ्र मरम्मत, इनका उपयोग सुनिश्चित करने के लिए पीएचसी से लेकर जिला अस्पतालों तक एक्विपमेंट्स मैंनेजमेंट एण्ड मैंटीनेंस सिस्टम की स्थापना की जा रही है।  
बिजली, पानी और सड़क को किया मजबूत          
श्रीमती राजे ने कहा कि बिजली, पानी और सड़क प्रदेश के विकास के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। इन तीनों ही क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देते हुए राज्य सरकार ने बिजली के वार्षिक औसत बजट आवंटन में 192प्रतिशत, पेयजल में 87.55 प्रतिशत और सार्वजनिक निर्माण विभाग में 140.87 प्रतिशत की वृद्धि की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत शेष रही 1480 ढाणी व मजरों को जोड़ने के लिए 1612 करोड़ रुपए की लागत से 4293 किमी डामर सड़क बनाई जाएगी। साथ ही, अजमेर, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, करौली, कोटा, झालावाड़, जोधपुर, नागौर, अलवर, हनुमानगढ़ एवं बीकानेर जिले की 500 किमी ग्रामीण सड़कों को मुख्य जिला सड़क के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। इसके अलावा दूसरे चरण में 2 हजार पंचायतों में गौरव पथ बनाए जाएंगे।  
जयपुर में 500 करोड़ रुपए के सीवरेज के काम होंगे      
    मुख्यमंत्री ने कहा कि जयपुर शहर की घनी आबादी वाले क्षेत्र में सीवरेज लाइनें डालने के लिए आने वाले ढाई साल में 500 करोड़ रुपए के काम हाथ में लिए जाएंगे। 
अजमेर अब खुले में शौच से मुक्त        
  श्रीमती राजे ने समारोह में अजमेर जिले को खुले में शौच से मुक्त जिला घोषित करते हुए कहा कि जल्द ही पाली, चूरू, झुझुनूं और गंगानगर जिले भी इस श्रेणी में शामिल होंगे। अब तक प्रदेश में 2329 ग्राम पंचायतें खुले में शौच से मुक्त हो चुकी हैं। 
रोज 1065 युवाओं को मिल रहा रोजगार      
    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में प्रतिदिन नई पेयजल परियोजनाओं पर 13 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। प्रतिदिन 125 हैक्टेयर से भी अधिक भूमि बूंद-बूंद और फव्वारा सिंचाई योजनाओं से जोड़ी जा रही है। प्रतिदिन 155 युवाओं का कौशल विकास हो रहा है। सरकारी अथवा गैर-सरकारी क्षेत्र में प्रतिदिन 1 हजार 65 युवाओं को रोजगार मिल रहा है और प्रतिदिन  2 हजार 940 युवा मुद्रा योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। इसके अलावा प्रतिदिन 90 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों का पंजीयन हो रहा है। प्रतिदिन 4 करोड़ 54 लाख रुपये सड़क निर्माण पर खर्च हो रहे हैं और करीब 14 किलोमीटर सड़क बन रही हैं। 

प्रधानमंत्री द्वारा 70वें स्‍वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले के प्राचीर से राष्‍ट्र को संबोधन


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 70वें स्‍वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले के प्राचीर से राष्‍ट्र को संबोधित किया।

श्री नरेन्‍द्र मोदी ने महात्‍मा गांधी, सरदार पटेल, पंडित जवाहरलाल नेहरू तथा असंख्‍य लोगों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्‍होने अपने जीवन का बलिदान दिया ताकि स्‍व्‍राज्‍य प्राप्‍त किया जा सके।

उन्‍होंने कहा कि 125 करोड़ भारतीयों ने अब यह संकल्‍प लिया है कि वे स्‍वराज्‍य से ‘सुराज’ की यात्रा को पूरा करेंगें। उन्‍होंने कहा कि सुराज की प्राप्ति के लिए, त्‍याग, कड़े परिश्रम, अनुशासन, समर्पण और साहस की आवश्‍यकता होती है और उन्‍होंने कहा कि पंचायत से लेकर संसद तक प्रत्‍येक संस्‍था को इस लक्ष्‍य की दिशा में मिलजुल कर काम करना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय था कि जब सरकार आरोपों से आकंठ डूबी हुई थी। उन्‍होंने ने कहा कि यह सरकार इसकी बजाय आकांक्षाओं से घिरी हुई है। उन्‍होंने कहा कि जहां उम्‍मीद आकांक्षाओं को बढ़ावा देती है, वहीं इससे सुराज की ओर तेज़ी से बढ़ने की ऊर्जा भी मिलती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वे सरकार द्वारा किए गए कार्य पर प्रकाश नहीं डालना चाहते अपितु सरकार के कार्य-संस्‍कृति का उल्‍लेख करना चाहेंगे।

प्रधानमंत्री ने संवेदनशीलता, दायित्‍व, जवाबदेही, पारदर्शिता, दक्षता तथा सुशासन जैसे सुराज के विभिन्‍न तत्‍वों को परिभाषित किया। उन्‍होंने प्रमुख अस्‍तपतालों में पंजीकरण, आयकर रिफण्‍ड की तत्‍परता से वापसी, पासपोर्ट डिलीवरी प्रक्रिया में तेज़ी से कंपनी का पंजीकरण तथा सरकारी नौकरियों में समूह ग और समूह घ के पदों के लिए साक्षात्‍कार समाप्‍त किए जाने के केंद्र सरकार के कामकाज के उदाहरणों के माध्‍यम से इन प्रत्‍येक तत्‍वों को समझाने को प्रयास किया।

प्रधानमंत्री ने उल्‍लेख किया कि सुशासन के महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों में सेवा प्रदान करने की गति किस प्रकार बढ़ी है। इस संदर्भ में उन्‍होने ग्रामीण सड़क निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा उत्‍पादन क्षमता निर्माण, पारेषण लाइन बिछाने तथा रसोई गैस कनेक्‍शनों का उदाहरण दिया।

प्रधानमंत्री ने कतिपय क्षेत्रों जैसे कि जनधन योजना के अंर्तगत थोड़े से समय में 21 करोड़ बैंक खाते का खुलना, ग्रामीण क्षेत्रों में 2 करोड़ शौचालयों का निर्माण तथा बिजली की सुविधा से वंचित 10 हजार गांवों को विद्युतीकरण के काम हो जाने के बारे में बड़े पैमाने पर अपने विचार रखे।

एलईडी बल्‍बों के विषय पर प्रधानमंत्री ने बताया कि इनके मूल्‍यों में भारी कमी की गई है ताकि अधिक से अधिक आम लोगों के बीच इसकी पहुंच बन सके। उन्‍होंने कहा कि बड़े पैमाने पर एलईडी बल्‍बों के इस्‍तेमाल से बिजली की खपत में भारी बचत होगी।

प्रधानमंत्री ने लगातार दो अकालों के बाद भी पर्याप्त फसलों का उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए सराहा। उन्होंने किसानों की सराहना की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष दालों की बुवाई की दिशा में भारी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कृषि के क्षेत्र की दिशा में सरकार के समन्वित दृष्टिकोण को स्पष्ट किया जिसमें मृदा, स्वास्थ्य कार्ड, सिचाईं, सौर पंप बीजस उर्वरक तथा फसल बीमा शमिल है।

श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार का ध्यान एक राष्ट्रीय पहचान का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य सुधार, निष्पादन, परिवर्तन है। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान प्रतीकात्मक की अपेक्षा सारभूत कार्य, विच्छिन्न विकास की अपेक्षा समेकित विकास तथा पात्रता की अपेक्षा सशक्तिकरण की ओर कहीं अधिक केंद्रित है।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि किस प्रकार उनकी सरकार अटके पड़े अथवा काफी समय से लंबित परियोजनाओं को पूरा करने में जुटी है और महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए अपेक्षित समय में किस प्रकार कमी कर रही है।

प्रभावी परिणाम देने के उदाहरण पेश करते हुए प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि गन्ने की बकाया राशि की मंजूरी, नए एलपीजी कनेक्शन और एयर इंडिया तथा बीएसएनएल जैसे सार्वजनिक उपक्रमों को किस प्रकार संचालन मुनाफों में लाया गया। पारदर्शिता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि सब्सिडी राशि को किस प्रकार जरूरतमंदों को देकर इसका बेहतर प्रबंधन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुशासन के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हुई प्रगति को अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने भी स्वीकार किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं कल्याण की दिशा में सरकार ने नरम और समन्वित दृष्टिकोण अपनाया है। जिसमें बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना तथा उज्जवला योजना जैसे कार्यक्रम शामिल हैं ताकि महिलाओं की शारीरिक, शैक्षिक एवं वित्तीय बेहतरी सुनिश्चित हो सकें। इस संबंध में उन्होंने कई अन्य सरकारी पहलों का उल्लेख किया।

सामाजिक एकता पर अपना सशक्त संदेश देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रत्येक भारतीय को रामानुजाचार्य, महात्मा गांधी और बाबा साहेब आंबेडकर सरीखे हमारे महान संतों, दार्शनिकों के शांति, एकता एवं भाईचारे के संदेश का पालन करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार की विभिन्न पहल एवं कार्यक्रम युवाओं के लिए रोजगार निर्माण में योगदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मॉडल दुकान और प्रतिष्ठान अधिनियम के चलते सप्ताह के सातों दिन दुकान खोलने में सुविधा रहेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार बड़े फैसलें लेने में किसी प्रकार का संकोच नहीं करती उन्होंने एक रैंक एक पेंशन, नेता जी की फाइलों का खुलासा तथा बांग्लादेश के साथ भूमि सीमा करार का इस संदर्भ में उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री ने आंतकवादियों को शहीदों के रूप में महिमा मंडित करने के प्रयासों की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि सारा विश्व भारतीय के मानवीय दृष्टिकोण को सराहेगा और सभी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों की एक स्वर में भर्त्सना करेगा।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को आगे ले जाने की दिशा में आम संकल्प लेने का लोगों से आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कुछ नई पहल की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों की मासिक पेंशन 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रूपये कर दी गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार देश भर में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित संग्रहालयों और स्मारकों के निर्माण की दिशा में काम करेगी। सरकार निर्धन लोगों के लिए अस्पताल में ईलाज की लागत पर एक लाख रुपये तक खर्च वहन करेगी।

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AKT/VM/SH/SK/RV/M
(Release ID 53604)
sabhar - pib

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर माननीय राष्ट्रपति का संदेश


प्यारे देशवासियो:

1. हमारी स्वतंत्रता की 69वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर मैं देश विदेश में रह रहे अपने सभी बहनों और भाइयों को हार्दिक बधाई देता हूं।

2. अपना 70वां स्वतंत्रता दिवस मनाते हुए, मैं हमारे स्वतंत्रता संग्राम के उन सभी ज्ञात और अज्ञात शूरवीरों को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं जिन्होंने हमें स्वतंत्रता दिलाने के लिए संघर्ष किया, कष्ट उठाया और अपना जीवन न्योछावर कर दिया महात्मा गांधी के ओजस्वी नेतृत्व से अन्तत: 1947 में अंग्रेजों को भारत छोड़ना पड़ा। 1947 में जब हमने स्वतंत्रता हासिल की, किसी को यह विश्वास नहीं था कि भारत में लोकतंत्र बना रहेगा तथापि सात दशकों के बाद सवा अरब भारतीयों ने अपनी संपूर्ण विविधता के साथ इन भविष्यवाणियों को गलत साबित कर दिया। हमारे संस्थापकों द्वारा न्याय, स्वतंत्रता, समता और भाईचारे के चार स्तंभों पर निर्मित लोकतंत्र के सशक्त ढांचे ने आंतरिक और बाहरी अनेक जोखिम सहन किए हैं और यह मजबूती से आगे बढ़ा है।

प्यारे देशवासियो:

3. मैं आज पांचवीं बार स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आपसे बात कर रहा हूं। पिछले चार वर्षों के दौरान, मैंने संतोषजनक ढंग से एक दल से दूसरे दल को, एक सरकार से दूसरी सरकार को और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण के साथ एक स्थिर और प्रगतिशील लोकतंत्र की पूर्ण सक्रियता को देखा है। राजनीतिक विचार की अलग-अलग धाराओं के बावजूद, मैंने सत्ताधारी दल और विपक्ष को देश के विकास, एकता, अखंडता और सुरक्षा के राष्ट्रीय कार्य को पूरा करने के लिए एक साथ कार्य करते हुए देखा है। संसद के अभी सम्पन्न हुए सत्र में निष्पक्षता और श्रेष्ठ परिचर्चाओं के बीच वस्तु और सेवा कर लागू करने के लिए संविधान संशोधन बिल का पारित होना हमारी लोकतांत्रिक परिपक्वता पर गौरव करने के लिए पर्याप्त है।

4. इन चार वर्षों में, मैंने कुछ अशांत, विघटनकारी और असहिष्णु शक्तियों को सिर उठाते हुए देखा है। हमारे राष्ट्रीय चरित्र के विरुद्ध कमजोर वर्गों पर हुए हमले पथभ्रष्टता है, जिससे सख्ती से निपटने की आवश्यकता है। हमारे समाज और शासनतंत्र की सामूहिक समझ ने मुझे यह विश्वास दिलाया है कि ऐसे तत्त्वों को निष्क्रिय कर दिया जाएगा और भारत की शानदार विकास गाथा बिना रुकावट के आगे बढ़ती रहेगी।

5. हमारी महिलाओं और बच्चों को दी गई सुरक्षा और हिफाजत देश और समाज की खुशहाली सुनिश्चित करती है। एक महिला या बच्चे के प्रति हिंसा की प्रत्येक घटना सभ्यता की आत्मा पर घाव कर देती है। यदि हम इस कर्तव्य में विफल रहते हैं तो हम एक सभ्य समाज नहीं कहला सकते।

प्यारे देशवासियो:

6. लोकतंत्र का अर्थ सरकार चुनने के लिए समय-समय पर किए गए कार्य से कहीं अधिक है। स्वतंत्रता के विशाल वृक्ष को लोकतंत्र की संस्थाओं द्वारा निरंतर पोषित करना चाहिए। समूहों और व्यक्तियों द्वारा विभाजनकारी राजनीतिक इरादे वाले व्यवधान, रुकावट और मूर्खतापूर्ण प्रयास से संस्थागत उपहास और संवैधानिक विध्वंस के अलावा कुछ हासिल नहीं होता है। परिचर्चा भंग होने से सार्वजनिक संवाद में त्रुटियां ही बढ़ती हैं।

7. हमारा संविधान न केवल एक राजनीतिक और विधिक दस्तावेज है बल्कि एक भावनात्मक, सांस्कृतिक और सामाजिक करार भी है। मेरे विशिष्ट पूर्ववर्ती डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने पचास वर्ष पहले स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कहा था, ‘‘हमने एक लोकतांत्रिक संविधान अपनाया है। यह मानककृत विचारशीलता और कार्य के बढ़ते दबावों के समक्ष हमारी व्यैक्तिकता को बनाए रखने में सहायता करेगा.... लोकतांत्रिक सभाएं सामाजिक तनाव को मुक्त करने वाले साधन के रूप में कार्य करती हैं और खतरनाक हालात को रोकती हैं। एक प्रभावी लोकतंत्र में, इसके सदस्यों को विधि और विधिक शक्ति को स्वीकार करने के लिए तैयार रहना चाहिए। कोई व्यक्ति, कोई समूह स्वयं विधि प्रदाता नहीं बन सकता।’’

8. संविधान में राष्ट्र के प्रत्येक अंग का कर्तव्य और दायित्व स्पष्ट किया गया है। जहां तक राष्ट्र के प्राधिकरणों और संस्थानों की बात है, इसने ‘मर्यादा’ की प्राचीन भारतीय परंपरा को स्थापित किया है। कार्यकर्ताओं को अपने कर्तव्य निभाने में इस ‘मर्यादा’ का पालन करके संविधान की मूल भावना को कायम रखना चाहिए।

प्यारे देशवासियो :

9. एक अनूठी विशेषता जिसने भारत को एक सूत्र में बांध रखा है, वह एक दूसरे की संस्कृतियों, मूल्यों और आस्थाओं के प्रति सम्मान है। बहुलवाद का मूल तत्त्व हमारी विविधता को सहेजने और अनेकता को महत्त्व देने में निहित है। आपस में जुड़े हुए वर्तमान माहौल में, एक देखभालपूर्ण समाज धर्म और आधुनिक विज्ञान के समन्वय द्वारा विकसित किया जा सकता है। स्वामी विवेकानंद ने एक बार कहा था, ‘‘विभिन्न प्रकार के पंथों के बीच सहभावना आवश्यक है, यह देखना होगा कि वे साथ खड़े हों या एकसाथ गिरें, एक ऐसी सहभावना जो परस्पर सम्मान न कि अपमान, सद्भावना की अल्प अभिव्यक्ति को बनाए रखने से पैदा हो।’’

10. यह सच है, जैसा कि 69 वर्ष पहले आज ही के दिन पंडित नेहरू ने एक प्रसिद्ध भाषण में कहा था कि एक राष्ट्र के इतिहास में, ऐसे क्षण आते हैं जब हम पुराने से नए की ओर कदम बढ़ाते हैं, जब एक राष्ट्र की आत्मा को अभिव्यक्ति प्राप्त होती है। परंतु यह अनुभव करना आवश्यक है कि ऐसे क्षण अनायास ही भाग्य की वजह से न आएं। एक राष्ट्र ऐसे क्षण पैदा कर सकता है और पैदा करने के प्रयास करने चाहिए। हमें अपने सपनों के भारत का निर्माण करने के लिए भाग्य को अपनी मुट्ठी में करना होगा। सशक्त राजनीतिक इच्छाशक्ति के द्वारा, हमें एक ऐसे भविष्य का निर्माण करना होगा जो साठ करोड़ युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाए, एक डिजीटल भारत, एक स्टार्ट-अप भारत और एक कुशल भारत का निर्माण करे। हम सैकड़ों स्मार्ट शहरों, नगरों और गांवों वाले भारत का निर्माण कर रहे हैं, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे ऐसे मानवीय, हाइटेक और खुशहाल स्थान बनें जो प्रौद्योगिकी प्रेरित हों परंतु साथ-साथ सहृदय समाज के रूप में भी निर्मित हों। हमें अपनी विचारशीलता के वैज्ञानिक तरीके से मेल न खाने वाले सिद्धांतों पर प्रश्न करके एक वैज्ञानिक प्रवृत्ति को प्रोत्साहन देना चाहिए और उसे मजबूत करना चाहिए। हमें यथास्थिति को चुनौती देना और अक्षमता और अव्यवस्थित कार्य को अस्वीकार करना सीखना होगा। एक स्पर्द्धात्मक वातावरण में, तात्कालिकता और कुछ अधीरता की भावना आवश्यक गुण होता है।

प्यारे देशवासियो:

11. भारत तभी विकास करेगा, जब समूचा भारत विकास करेगा। पिछड़े लोगों को विकास की प्रक्रिया में शामिल करना होगा। आहत और भटके लोगों को मुख्यधारा में वापस लाना होगा। प्रौद्योगिक उन्नति के इस दौर में, व्यक्तियों का स्थान मशीनें ले रही हैं। इससे बचने का एकमात्र उपाय ज्ञान और कौशल अर्जित करना और नवान्वेषण सीखना है। हमारी जनता की आकांक्षाओं से जुड़े समावेशी नवान्वेषण समाज के बड़े हिस्से को लाभ पहुंचा सकते हैं और हमारी अनेकता को भी सहेज सकते हैं। एक राष्ट्र के रूप में हमें रचनात्मकता, विज्ञान और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना चाहिए। इसमें, हमारे स्कूल और उच्च शिक्षा संस्थानों का एक विशेष दायित्व है।

12. हम अकसर अपने प्राचीन अतीत की उपलब्धियों पर खुशी मनाते हैं, परंतु अपनी सफलताओं से संतुष्ट होकर बैठ जाना सही नहीं होगा। भविष्य की ओर देखना ज्यादा जरूरी है। सहयोग करने, नवान्वेषण करने और विकास के लिए एकजुट होने का समय आ गया है। भारत ने हाल ही में उल्लेखनीय प्रगति की है, पिछले दशक के दौरान प्रतिवर्ष अधिकतर आठ प्रतिशत से ऊपर की विकास दर हासिल की गई है। अंतरराष्ट्रीय अभिकरणों ने विश्व की सबसे तेजी से बढ़ रही प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में भारत के स्तर को पहचाना है और व्यापार और संचालन के सरल कार्य-निष्पादन के सूचकांकों में पर्याप्त सुधार को मान्यता दी है। हमारे युवा उद्यमियों के स्टार्ट-अप आंदोलन और नवोन्मेषी भावना ने भी अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकृष्ट किया है। हमें अपनी मजबूत विशेषताओं में वृद्धि करनी होगी ताकि यह बढ़त कायम रहे और आगे बढ़ती रहे। इस वर्ष के सामान्य मानसून ने हमें पिछले दो वर्षों, जब कम वर्षा ने कृषि संकट खड़ा कर दिया था, के विपरीत खुश होने का कारण दिया है। यह तथ्य कि दो लगातार सूखे वर्षों के बावजूद भी, मुद्रा-स्फीति 6 प्रतिशत से कम रही और कृषि उत्पादन स्थिर रहा, हमारे देश के लचीलेपन का और इस बात का भी साक्ष्य है कि स्वतंत्रता के बाद हमने कितनी प्रगति की है।

प्यारे देशवासियो:

13. हाल के समय में हमारी विदेश नीति में काफी सक्रियता दिखाई दी है। हमने अफ्रीका और एशिया प्रशांत के पारंपरिक साझीदारों के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को पुन: सशक्त किया है। हम सभी देशों, विशेषकर अपने निकटतम विस्तारित पड़ोस के साथ साझे मूल्यों और परस्पर लाभ पर आधारित नए रिश्ते स्थापित करने की प्रक्रिया में हैं। हम अपनी ‘पड़ोस प्रथम नीति’ से पीछे नहीं हटेंगे। इतिहास, संस्कृति, सभ्यता और भूगोल के घनिष्ठ संबंध दक्षिण एशिया के लोगों को एक साझे भविष्य का निर्माण करने और समृद्धि की ओर मिलकर अग्रसर होने का विशेष अवसर प्रदान करते हैं। इस अवसर को बिना देरी किए हासिल करना होगा। विदेश नीति पर भारत का ध्यान शांत सह-अस्तित्व और इसके आर्थिक विकास के लिए प्रौद्योगिकी और संसाधनों के उपयोग पर केंद्रित होगा। हाल में की गई पहलों ने ऊर्जा सुरक्षा में संवर्धन किया है। खाद्य सुरक्षा को बढ़ाया है और हमारे प्रमुख विकास कार्यक्रमों को आगे ले जाने में अंतरराष्ट्रीय साझीदारी का सर्जन किया है।

14. विश्व में उन आतंकवादी गतिविधियों में तेजी आई है जिनकी जड़ें धर्म के आधार पर लोगों को कट्टर बनाने में छिपी हुई हैं। ये ताकतें धर्म के नाम पर निर्दोष लोगों की हत्या के अलावा भौगोलिक सीमाओं को बदलने की धमकी भी दे रही हैं जो विश्व शांति के लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकता है। ऐसे समूहों की अमानवीय, मूर्खतापूर्ण और बर्बरतापूर्ण कार्यप्रणाली हाल ही में फ्रांस, बेल्जियम, अमरीका, नाइजीरिया, केन्या और हमारे निकट अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश में दिखाई दी है। ये ताकतें अब सम्पूर्ण राष्ट्र समूह के प्रति एक खतरा पैदा कर रही हैं। विश्व को बिना शर्त और एक स्वर में इनका मुकाबला करना होगा।

प्यारे देशवासियो:

15. उन सभी चुनौतियों के लिए जो हमारे सामने हैं, मेरा प्राचीन देश के रूप में हमारी जन्मजात और विरासत में मिली क्षमता में पूरा विश्वास है जिसकी मूल भावना तथा जीने और उत्कृष्ट कार्य करने की जिजीविषा का कभी दमन नहीं किया जा सकता। अनेक बाहरी और आंतरिक शक्तियों ने सहस्राब्दियों से भारत की इस मूल भावना को दबाने का प्रयास किया है परंतु हर बार यह अपने सम्मुख प्रत्येक चुनौती को समाप्त, आत्मसात और समाहित करके और अधिक शक्तिशाली और यशस्वी होकर उभरी है।

16. भारत ने अपने विशिष्ट सभ्यतागत योगदान के द्वारा अशांत विश्व को बार-बार शांति और सौहार्द का संदेश दिया है। 1970 में इतिहासकार आर्नोल्ड टॉयनबी ने समकालीन इतिहास में भारत की भूमिका के बारे में कहा था, ‘‘आज, हम विश्व इतिहास के इस संक्रमणकारी युग में जी रहे हैं, परंतु यह पहले ही स्पष्ट होता जा रहा है कि इस पश्चिमी शुरुआत का, यदि इसका अंत मानव जाति के आत्मविनाश से नहीं हो रहा है तो समापन भारतीय होगा।’’ टॉयनबी ने आगे यह भी कहा कि मानव इतिहास के मुकाम पर, मानवता की रक्षा का एकमात्र उपाय भारतीय तरीका है।

प्यारे देशवासियो:

17. मैं इस अवसर पर, हमारे सैन्य बलों, अर्द्धसैन्य और आंतरिक सुरक्षा बलों के उन सदस्यों को विशेष बधाई और धन्यवाद देता हूं जो हमारी मातृभूमि की एकता, अखंडता और सुरक्षा की चौकसी तथा रक्षा इन्हें कायम रखने के लिए अग्रिम सीमाओं पर डटे हुए हैं।

18. अंत में मैं एक बार दोबारा उपनिषद का आह्वान करता हूं जैसा कि मैंने चार वर्ष पूर्व स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर अपने संबोधन में किया था। यह भारत माता की तरह सदैव जीवंत रहेगी:

‘‘ईश्वर हमारी रक्षा करे

ईश्वर हमारा पोषण करे

हम मिलकर उत्साह और ऊर्जा के साथ कार्य करें

हमारा अध्ययन श्रेष्ठ हो

हमारे बीच कोई वैमनस्य ना हो

चारों ओर शांति ही शांति हो।’’

जय हिंद!

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sabhar - pib
AKT/SH

Tuesday, 22 March 2016

अखिल भारतीय ज्योतिष महासम्मेलन में भारतीय विद्याओं, मन्त्रों, प्रमुखत: वैदिक मंत्रो आदि के परिप्रेक्ष्य में सुख, शांति, समृद्धि बढ़ाने के साथ विश्व एवम् देश के सामने आने वाली चुनोतियों के समाधान पर होगा वाचन - ज्योतिष प्रज्ञाचार्य महावीर कुमार सोनी

श्री श्री 1008 ब्रह्मपीठाधीश्वर संत श्री नारायण दास जी महाराज द्वारा 'अखिल भारतीय ज्योतिष एवम् वास्तु महासम्मेलन' को मंगल आशीर्वाद

जयपुर। इंटरनेशनल सेंटर फॉर ज्योतिष, वास्तु, स्पिरिचुअल एन्ड कल्चरल एक्टिविटीज ट्रस्ट की ओर से जयपुर में दिनाक 7 एवम् 8 मई को होने जा रहे 'अखिल भारतीय ज्योतिष एवम् वास्तु महासम्मेलन" को श्री श्री 1008 ब्रह्मपीठाधीश्वर संत श्री  नारायण दास जी महाराज का मंगल आशीर्वाद प्राप्त हुआ। सेमीनार के मुख्य समन्वयक ज्योतिर्विद् महावीर कुमार सोनी एवम् संयोजक आचार्य घनश्याम शर्मा ने इस अवसर पर श्री नारायण दास जी महाराज को बताया गया कि देश में पहली बार ज्योतिष, वास्तु एवम् रेकी के साथ भारतीय विद्याओं, मन्त्रों, प्रमुखत: वैदिक मंत्रो आदि के परिप्रेक्ष्य में सुख, शांति, समृद्धि बढ़ाने के साथ विश्व एवम् देश के सामने आने वाली चुनोतियों के समाधान पर इसमें वाचन होगा, इसके द्वारा इस प्रकार की  प्रमुख समस्याओं के निराकरण का मार्ग खोजने का प्रयास किया जावेगा।
 महाराज जी द्वारा इस सम्बन्ध में अत्यंत हर्ष व्यक्त किया गया, आयोजन के सफल होने का उन्होंने आशीर्वाद प्रदान किया।
सेमीनार की विषय वस्तु को लेकर तैयार किए गए प्रारंभिक पोस्टर के अवलोकन कराते हुए गण मान्य लोगों से चर्चा, परिचर्चा एवम परामर्श लेते हुए सेमीनार कार्यक्रम के प्रारम्भिक पोस्टर के साथ गति दी जा चुकी है।
कार्यक्रम संबंधी प्रारम्भिक पोस्टर के साथ यहाँ प्रस्तुत है प. पू. श्री नारायणदास जी महाराज, महामण्डलेश्वर बालमुकंदाचार्य जी महाराज, प्रख्यात ज्योतिष शास्त्री प्रो. विनोद शास्त्री सहित ज्योतिष एवं वास्तु विद्वानों के साथ कार्यक्रम को गति प्रदान करते हुए की कुछ झलकियाँ। सेमीनार से जुड़ने के लिए  मोबाइल नंबर: 9782560245 एवम् 9414240878 से अधिक जानकारी ली जा सकती है।




















Thursday, 18 February 2016

लघु ज्योतिष एवं वास्तु संगोष्ठी दि. 15.2.16 (द्वारा "इंटरनेशनल सेंटर फॉर ज्योतिष, वास्तु, स्पिरिचुअल एंड कल्चरल एक्टिविटीज") देखें वास्तु टिप्स का उपयोगी वीडियो


संगोष्ठी में ज्योतिर्विद् महावीर कुमार सोनी के ज्योतिषीय उपायों के लेखों को लेकर प्रकाशित "ज्योतिष भारती" अंक का विमोचन भी किया गया
जयपुर। ज्योतिष वास्तु, एवं रेकी जेसी स्प्रिचुअल विद्याओं में शोध एवं अनुसन्धान को गति देने के क्रम में इंटरनेशनल सेंटर फॉर ज्योतिष, वास्तु स्प्रिचुअल एंड कल्चरल एक्टिविटीज ट्रस्ट (रजि.) द्वारा जयपुर में दिनांक 15.2.16 को फिर एक लघु संगोष्ठी का आयोजन किया गया, इसमें ज्योतिषी एवं वास्तुविद के रूप में आचार्य घनश्याम शर्मा, ज्योतिर्विद् महावीर सोनी, श्रीमती गायत्री वर्मा, श्रीमती मीनाक्षी शर्मा, श्रीमती बबीता राठी, श्रीमती संतोष चतुर्वेदी, डॉ. टीना जैन, श्रीमती संगीता माथुर, दिनेश कुमावत, संकेत राज भारद्वाज आदि द्वारा हिस्सा लिया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता ज्योतिर्विद्, हस्तरेखाविद् एवं वास्तुविद महावीर कुमार सोनी द्वारा की गई, संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने बताया कि आज की संगोष्ठी का मुख्य विषय धन एवं सुख शांति बढ़ाने के उपायों पर केंद्रित रखा जा रहा है, वास्तु दोष संबंधी किन कारणों से सुख शांति बाधित होती है, कड़ी मेहनत के बाद भी आशा अनुसार धन कम आता है या अपेक्षा अनुसार टिकता नहीं है, इस सम्बन्ध में बिना विशेष तोड़फोड़ या विशेष परिवर्तन के क्या क्या उपाय हैं, पर मुख्य रूप से आज चर्चा - परिचर्चा की जावेगी, सोनी ने कहा कि सभी विद्वानजनों से अनुरोध किया कि वे अपने ज्ञान व योग्यताओं के परिप्रेक्ष्य में अपने अनुभव लिए हुए सटीक उपाय ही यहाँ शेयर करें। सोनी ने आगे बोलते हुए बताया कि संगोष्ठी के अंत से पूर्व, अर्थात आपस में चर्चा परिचर्चा के बाद कोई भी दो वक्ताओं द्वारा आमजन को वास्तु टिप्स बताने हेतु दो वीडियो भी तैयार किए जावेंगे, जो यू- ट्यूब पर अपलोड किए जावेंगे। इसके बाद इस क्रम में सभी उपस्थित ज्योतिर्विदों एवं वास्तुविदों द्वारा ज्योतिष एवं वास्तु विषयों पर पर चर्चा परिचर्चा की गई, विशेष रूप से बिना तोड़फोड़ के वास्तु दोष संबंधी उपचारों पर जानकारियां शेयर की गई। गोष्ठी में नागरिक कल्याण परिषद के अध्यक्ष वीरेंद्र गोदिका एडवोकेट एवं गठजोड़ की संपादक श्रीमती सुरेखा सोनी ने भी हिस्सा लिया। इस अवसर पर ज्योतिर्विद् महावीर कुमार सोनी के ज्योतिषीय उपायों संबंधी नवीन शोध एवं अनुसंधानों के लेखों को लेकर प्रकाशित "ज्योतिष भारती" अंक का विमोचन भी किया गया। इस अंक में सफलता हेतु अपना नाम कैसे अक्षरों को लेकर लिखा जावे, बालक बालिका के भावी जीवन में सफलता हेतु नामकरण की सही विधि क्या है, ग्रह शांति के उपायों में रत्न धारण में क्या क्या सावधानियां आवश्यक है, सहित विभिन्न लेख हैं। संगोष्ठी के अंत से पूर्व वीडियो जारी करने हेतु वक्ताओं के रूप में प्रख्यात ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद आचार्य घनश्याम शर्मा एवं श्रीमती मीनाक्षी शर्मा को चुना जाकर इनके द्वारा धन एवं सुखशांति बढ़ाने हेतु अपने टिप्स आमजन हेतु बताए गए, जिस पर आधारित वीडियो निम्न लिंक पर जाकर देखे जा सकते हैं -
Part 1
https://www.youtube.com/watch?v=KH-kXi3GZ1Y
Part 2
https://www.youtube.com/watch?v=cj8X7irG42c



Wednesday, 27 January 2016

ज्योतिष एवं वास्तु विषयों पर नि:शुल्क वर्कशॉप

जयपुर। इंटरनेशनल सेंटर फॉर ज्योतिष, वास्तु, स्पिरिचुअल एन्ड कल्चरल एक्टिविटीज ट्रस्ट की ओर से ज्योतिष एवं वास्तु विषयों पर एक लघु वर्कशॉप रविवार, दिनांक 31 जनवरी को प्रात: 10 से सांय 5 बजे तक जयपुर (राजस्थान) में आयोजित होने जा रही है। जो भी  इस वर्कशॉप में आकर इन विषयों पर समाधान चाहते हैं, जानकारी अर्जित करना चाहते हैं, वे मोबाइल पर फोन कर अपना रजिस्ट्रेशन करा लें।
वर्कशॉप पूर्णत: नि:शुल्क आयोजित हो रही है, वर्कशॉप किसान मार्ग, टोंक फाटक पर होगी, वर्कशॉप हेतु स्थान सीमित हैं, जो पूर्व में फोन द्वारा रजिस्ट्रेशन करावेंगे, वो ही इसमें हिस्सा ले सकेंगे।
डॉ. टीना जैन, कार्यक्रम संयोजक
मो. 07822061620
     09782560245

Friday, 22 January 2016

Wikipedia 15th Birthday was celebrated in Jaipur - Jyotirvid Mahavir Kumar Soni, ICJVSCA

Apabhraṃśa Sahitya needs attention @Wikipedia
Jaipur , 17  January 2016:  Wikipedia 15th Birthday was celebrated at Shilp Gram side of Jawahar Kala Kendra, Jaipur.   Wikipedia completed its 15th year as The World’s Encyclopedia on January 15th 2016. It is considered as the prime source of information by the most of the people in the world.
Wikipedia is a Web-based, multi-language, free-content encyclopedia written collaboratively by volunteers, scholars, researchers and literates around the world. It has editions in about 180 languages and contains entries on traditional encyclopedic topics and on almanac, gazetteer, and current events topics. It contains about 2.3 million articles. More than 700,000 of these are in English, more than 250,000 in German, more than 150,000 in French and more than 100,000 in Japanese, Swedish and Italian. 
Among the distinguished guests the former chairperson of RSHRC Justice Nagendera Kumar Jain said:-
 “Wikipedia is doing a tremendous job of providing unprecedented help support and guidance in the form of information as the world encyclopedia. It is playing a very crucial & important role in our life just like Veda’s & Purans have shaped our present civilization. It is going shape the future world being a reliable digital source of info. on any subject topic ranging from a pin-point till inter Galactic black-holes and beyond. With this kind of information reference we have to get actively get involved and present the correct information on topics like Apabhraṃśa Sahitya or Literature which is almost extinct due to prevalence and social religious dogma. In other words we must increase the efforts in training our researchers and scholars to get involved on such platform and provide the correct picture”
imilarly, Prof. Kamal Chand Sogani eminent scholar of Apabhraṃśa Sahitya Academy said: “We have to keep the pace with the rest of the world and provide the most reliable and credible interpretations of the Manuscripts or Pandulipis. Since the present generation is already so much involved in understanding the modern infrastructure there is a stronger need for scholars and literates to ensure unbiased information in its core form.” He further took the guests around the Reception and ICH side of the JKK and explained the wall depictions from these scriptures.
National Fame Jyotirvid and Senior Journalists Mahavir Kumar Soni from International centre for Jyotish, Vastu, Spiritual & Cultural Activities Trust said: “Wikipedia is already holding a detailed documentation on the topics like History, Jyotish, Vastu and Culture supported with the relevant references & research work published so far. But some of the research work which was never published and is kept as Sacred Notes locked in the temples shall get justice and place on Wikipedia”    
One of the Anonymous contributors wearing a mask said “Wikipedia is already guiding the Artificial intelligence and it will be treated as the future reference and we have to ensure that machines are able to identify the humanitarian aspects”
The celebrations were concluded with the release of best wishes for Wikipedia hand written on wishing lanterns by the guests.





Wednesday, 6 January 2016

पर्यावरण को कैसे मिले बड़ी गति - ज्योतिर्विद महावीर कुमार सोनी

पर्यावरण को बचाना  एवं पर्यावरण गतिविधियों को बढाना सबसे बड़ा उद्देश्य घोषित किया जाना चाहिए, इसमें अब जरा सा भी विलम्ब नहीं किया जाना चाहिए। पर्यावरण के लिए जो भी व्यक्ति या संस्थाएं काम कर रही है, कर रहे हैं, चाहे उनमे कोई कम कर रहा है या  कोई ज्यादा, सभी को प्रोत्साहित किया जाने के प्रयास किए जाकर उनको इस हेतु और आगे लाने के प्रयास होने चाहिए। मेरे विचार से पब्लिक ट्रांसपोर्ट  को इस प्रकार से अच्छा एवं सुविधाजनक किया जाना चाहिए कि आमजन इनमें ही सवारी को  प्रोत्साहित हो, अर्थात स्वयं के वाहन होने के बावजूद लोग इन पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ही उपयोग करे, इसके प्रयास अविलम्ब होने चाहिए। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को कैसे अच्छा से अच्छा किया जा सकता है, इस हेतु दुपहिया एवं चार पहिया वाहन चालको को बड़ी संख्या में शामिल करते हुए सभी से सुझाव लिए जाने चाहिए,  इनसे ही मुख्य रूप से पूछा जाना चाहिए कि ये किस स्थिति में अपने निजी वाहनों को छोड़ कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट को महत्व दे सकते हैं। एक ही क्षेत्र में आसपास के कार्यालयों के अधिकारी कर्मचारियों  के लिए विशेष बसें लगाने पर विचार किया जाना चाहिए, एक ही रूट पर आने वाली कॉलोनियों से अधिकारी कर्मचारी किस स्थिति इन बसों में ऑफिस आने जाने के लिए उत्साहित होंगे, तैयार होंगे,  इस पर विचार कर सुझावों पर शीघ्र क्रियान्वन किया जाना चाहिए।  डीजल से चलने वाली गाड़ियों से प्रदूषण पेट्रोल के तुलनात्मक रूप से कितना अधिक एवं वातावरण में  कितना तेजी से जल्दी बढ़ रहा है, इसकी समीक्षा/जांच की जाकर, इनको कम करने  या बंद करने आदि पर भी विचार किया जा सकता है। प्रदूषण कम फैलाने वाले  या बिलकुल नहीं फैलाने वाले रिक्शा आदि जैसे वाहनों  को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।