Sunday, 15 October 2017

48 वां राज्यपालों का सम्मेलन राष्ट्रपति भवन में संपन्न हुआ


दिनांक 13 अक्टूबर 2017 को राष्ट्रपति भवन में दो दिनों से चल रहे 48 वें राज्यपालों के सम्मेलन का समापन हो गया। 
अपने समापन भाषण में राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने सम्मेलन में राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर विचारों के आदान-प्रदान से संतोष व्यक्त किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि राज्यपाल युवा पीढ़ी को सही दिशा-निर्देश दे सकते हैं और छात्रों तथा शिक्षकों के साथ लगातार मिलकर देश के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। नवीन प्रक्रिया केन्द्रों के विकास के लिए वे राज्यों के विश्वविद्यालयों को प्रेरित कर सकते हैं। राज्यपालों की भूमिका जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा और विकास सुनिश्चित करने के लिए अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
राष्ट्रपति ने कहा कि राज्यों और राज्यपालों को अपने सफल कार्यक्रमों के बारे में उनके समकक्षों के साथ जानकारी साझा करनी चाहिए। राज्यों के बीच उपलब्धियों और समस्याओं दोनों पर विचार-विमर्श सहकारी संघवाद को एक नया आयाम देगा। 
राष्ट्रपति ने कहा कि सम्मेलन के दौरान स्वच्छता, पर्यावरण, ऊर्जा संरक्षण और असंगत व्यय को कम करने संबंधित मुद्दों के बारे में उपयोगी अनुभव साझा किए गए। कई राज भवनों को विरासत भवनों का दर्जा दिया गया है। उन्होंने 'ग्रीन बिल्डिंग' और 'स्मार्ट बिल्डिंग' की विशेष विशेषताओं को शामिल करने का आग्रह किया, ताकि राज भवनों की विरासत की स्थिति को बरकरार रखा जा सके।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में तभी उभरेगा, जब प्रत्येक राज्य विकसित होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्यपाल और उप-राज्यपाल अपने संबंधित राज्यों में विकास को एक नई दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान जारी रखेंगे।
उपराष्ट्रपति,प्रधान मंत्री, गृह मंत्री, विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री ने भी आज सम्मेलन को संबोधित किया।

इस अवसर पर बोलते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि राज्यपालों को इस परिवर्तन प्रक्रिया को उत्प्रेरक और सुविधाजनक बनाने के लिए कार्य करना चाहिए। उनका अंतिम उद्देश्य आम नागरिकों की सेवा करना है और यह सुनिश्चित करना है कि विकास का लाभ आम लोगों तक पहुंचें।
इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हमारे देश में विचारों, संसाधनों और क्षमताओं की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल सरकार की पहल को बेहतर तरीके से प्रभावी एवं सुगम बना सकते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय एकता के प्रति जागरूक प्रयास करने पर जोर दिया। इस संबंध में,  प्रधान मंत्री ने राज्यपालों से आग्रह किया कि वे 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' और 'रन फॉर यूनिटी' जैसी पहलों में अपना योगदान दें। 
केन्द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राज्यपाल केन्द्र और राज्य सरकार के बीच सेतु का काम कर सकते हैं।  राज्यपाल आत्मविश्वास के निर्माण के उपायों को मजबूत करने के लिए अपना योगदान दे सकते हैं ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों का विश्वास बनाए रखा जा सके।   
इससे पहले दिन में, राज्यपालों ने अपने संबंधित राज्यों / केन्द्र शासित क्षेत्रों से संबंधित विशेष मुद्दों पर संक्षिप्त टिप्पणी की। 'न्यू इंडिया 2022 के संसाधन',  'न्यू इंडिया 2022 के लिए लोक सेवा' और 'राज्यों में उच्च शिक्षा और कौशल विकास' पर सत्रों की प्रस्तुतियां-जो 12 अक्टूबर, 2017 को हुई थी, वो आज भी की गई।
राज्यपालों के सम्मेलन की परंपरा लगभग आजादी जितनी ही पुरानी है। 1949 में राष्ट्रपति भवन में राज्यपालों का पहला सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसकी अध्यक्षता भारत के गवर्नर जनरल श्री सी राजगोपालाचारी ने की थी। तब से, 48 ऐसे सम्मेलनों का आयोजन राष्ट्रपति भवन में किया जा चुका है।
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वीके/पीकेपी– 5064 


Friday, 29 September 2017

महावीर कुमार सोनी ने "महान वीरांगना अबक्का रानी" पुस्तक की प्रति मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जी को भेंट की, मुख्यमंत्री ने वाह कहते हुए की सराहना

लेखक एवं पत्रकार ज्योतिर्विद महावीर कुमार सोनी ने हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र द्वारा प्रकाशित उनकी पुस्तक "देश की प्रथम महिला स्वतंत्रता सैनानी महान वीरांगना अबक्का रानी" की प्रति प्रदेश की लोकप्रिय मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जी को भेंट की। सोनी ने मुख्यमंत्री को बताया कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह विशेष उदाहरण सामने आया है, जिसमें देश की प्रथम महिला स्वतंत्रता सैनानी महान वीरांगना अबक्का रानी थी। मुख्यमंत्री ऐसी जानकारी लिए हुए पुस्तक को देखकर अत्यन्त हर्षित हुई और इस हेतु उन्होंने सराहना की। मुख्यमंत्री की ज्योतिर्विद महावीर सोनी को प्रत्यक्ष में यह तीसरी बार की गई सराहना है, इस प्रकार के रचनात्मक या सामाजिक कार्यों पर मुख्यमंत्री ने सदैव सराहना की है, जिससे इस प्रकार के कार्यों में अपार उत्साह वृद्धि के साथ निरंतर गति बनी है






Saturday, 19 August 2017

Friday, 14 July 2017

महा - मनीषी आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागरजी महाराज के चतुर्थ कालीन चर्या के क्षणों के चित्रों पर आधारित  एक शार्ट फिल्म (विडियो फिल्म), जिसमें गुरुवर के बचपन से लेकर दीक्षा के दुर्लभ चित्रों का भी समावेश है

संयम स्वर्ण महोत्सव

"आओ करें गुरु वंदना"

परम पूज्य आचार्य श्री 108  विद्यासागर जी महाराज

गठजोड़ परिवार प्रस्तुति 


संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागरजी महाराज की मुनि दीक्षा के गौरवशाली 50 वर्ष अगले वर्ष दिनांक 28-06-2018 को पूर्ण होने जा रहे हैं। इस अवसर पर दिनांक 28-6-2017 से शुरू होकर पूरे एक वर्ष के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। संयम स्वर्ण महोत्सव के रूप में देश विदेश में गुरुवर के असीम गुणों की स्तुति की जा रही है| इसी क्रम में हिंदी समाचार पत्र गठजोड़ परिवार गुरुवर के चरणों में  "आओ करें गुरु वंदना" के रूप में यह प्रस्तुति लेकर आया है| इसमें परम पूज्य आचार्य श्री 108  विद्यासागर जी महाराज के बचपन से लेकर मुनि दीक्षा एवं चतुर्थ कालीन चर्या के क्षणों के चित्रों को गुरु वंदना के मंगलमय स्वरों के साथ प्रस्तुत किया गया है| 

Friday, 2 June 2017

मुख्यमंत्री ने लॉन्च की राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी की वेबसाइट

जयपुर, एक जून। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने मुख्यमंत्री कार्यालय में राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) की आधिकारिक वेबसाइट लॉन्च की। सभी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स एवं रियल एस्टेट एजेन्ट्स के लिए इस वेबसाइट पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि तेजी से बढ़ते हुए रियल एस्टेट क्षेत्र में उपभोक्ताओं को जागरुक बनाने एवं उनके हितों को सुरक्षित करने की दिशा में यह वेबसाइट महत्वपूर्ण साबित होगी। श्रीमती राजे ने उपस्थित रियल एस्टेट क्षेत्र के प्रतिनिधियों का आह्वान करते हुए कहा कि राजस्थान अफोर्डेबल हाउसिंग के क्षेत्र में सबसे पहले शुरुआत करने वाला प्रदेश है। इस बढ़त को बरकरार रखते हुए आमजन को सस्ते एवं गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराने के लिए अफोर्डेबल हाउसिंग को और बढ़ावा देने की जरूरत है।   

उल्लेखनीय है कि वेबसाइट rera-rajasthan.in के लॉन्च होने के बाद इस पर पंजीकरण कराए बिना कोई भी नया रियल एस्टेट प्रोजेक्ट शुरू नहीं किया जा सकेगा। पहले से चल रहे प्रोजेक्ट्स को इस वेबसाइट पर पंजीकरण के लिए तीन महीने का समय मिलेगा।

वेबसाइट लॉन्चिंग के अवसर पर नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री श्री श्रीचंद कृपलानी, अतिरिक्त मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवासन श्री मुकेश शर्मा, प्रमुख शासन सचिव स्वायत्त शासन डॉ. मंजीत सिंह, डीएलबी के निदेशक श्री पवन अरोड़ा सहित वरिष्ठ अधिकारी एवं क्रेडाई राजस्थान व टोडार संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित थे। 




Monday, 9 January 2017

कड़े निर्णयों से ही देश बन सकेगा समृद्धिशाली विकसित राष्ट्र - ज्योतिर्विद महावीर कुमार सोनी

कड़े निर्णयों से ही देश बन सकेगा समृद्धिशाली विकसित राष्ट्र
                                                               (लेख  - ज्योतिर्विद महावीर कुमार सोनी)

मोदी सरकार के नोटबंदी के निर्णय पर तरह तरह से सवाल उठा रहे लोगों के पास अब इसको लेकर आलोचना का एक मुख्य मुद्दा भी अब समाप्त हो गया, जब आई. टी. विभाग ने निर्देश जारी कर 8 नवम्बर से पहले बैंक बचत खातों में हुए लेन देन की जानकारी हेतु बैंकों के लिए आदेश जारी कर दिए। सैन्ट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज (सी.बी.डी.टी) द्वारा 6 जनवरी को जारी राजपत्रित अधिसूचना में कहा गया है कि सभी बैंक मूल भूत बचतों तथा समय आधारित जमाओं को छोड़कर सभी नकद जमाओं की पूरी जानकारी आयकर विभाग को उपलब्ध कराएं।
ज्ञातव्य है की भाजपा सरकार पर यह आरोप विगत कई दिनों से लग रहा था कि नोटबंदी की जानकारी भाजपा के कई नेताओ को पूर्व से ही थी, अत: नोटबंदी के निर्णय से पूर्व ही इनके द्वारा 500 एवं 1000 के नोट बदलने का कार्य बड़े स्तर पर हो गया।  इसके मद्देनजर कई राजनैतिक पार्टियों के नेता यह मांग कर रहे थे कि सरकार 8 नवम्बर 2016 के पहले बैंकों में हुए लेन देन को सामने लाने के निर्देश जारी करे, क्योंकि नोटों को बदलने का कार्य तो 8 नवम्बर से पूर्व ही हो गया था। 
आयकर विभाग द्वारा अब सभी बैंकों और डाकघरों से 1 अप्रेल 2016 से 9 नवम्बर के बीच सेविंग अकाउंट में जमा होने वाले कैश डिपॉजिट की रिपोर्ट मांगी है। आयकर विभाग ने नोट बंदी से पहले हुए लेनदेन के बारे में जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से यह रिपोर्ट मांगी है। इस निर्णय से मोदी सरकार की एक और निष्पक्षता सामने आ गई है, वहीं इस तरह की मांग के साथ नोट बंदी के प्रति आलोचना कर रहे आलोचकों के पास अब इस मुद्दे पर कहने के लिए कुछ ख़ास नहीं रहा है। यदि सरकार 9 नवंबर से पूर्व बैंक डिपाजिट संबंधी लेनदेन को सख्ती के साथ निर्धारित समय सीमा में प्राप्त कर इसकी सूचना सार्वजनिक कर देती है तो यह देश के इतिहास में ऐसा कदम कहलाएगा जिसकी तुलना किसी अन्य साहसिक निर्णय से करना कठिन हो जावेगा, वहीँ यह कदम सदभावना पूर्वक आलोचना करने वालों को भी यह कहने को मजबूर कर देगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की कथनी और करनी एक है, उनकी नजर में सब बराबर है, यदि कोई गलत कर रहा है चाहे भाजपा का नेता हो, या दूसरी पार्टी का, इससे उन्हें कोई सरोकार नहीं है। कानून की नज़र में सब बराबर है, जिसने जो किया है उसकी उसे सजा भुगतनी ही होगी।  
उल्लेखनीय है कि सम्पति शोध कंपनी न्यू वर्ल्ड के अनुसार रूस के बाद भारत दुनिया का सबसे ज्यादा असमानता वाला देश है, जहाँ पर 54 प्रतिशत सम्पति मात्र कुछ करोड़पतियों के हाथ में है। भारत दुनिया के 10 सबसे अमीर देशों में है, जहाँ कुल संपत्ति 5600 अरब डॉलर है, लेकिन औसतन भारतीय गरीब है। वैश्विक तौर पर रूस दुनिया का सबसे ज्यादा असमानता वाला देश है,जहाँ कुल सम्पति के 62 प्रतिशत पर मात्र कुछ धन कुबेरों का नियंत्रण है। वहीँ दूसरी तरफ जापान दुनिया में सबसे ज्यादा समानता वाला देश है, जहाँ धनवान लोगों के हाथ में कुल सम्पति का 22 प्रतिशत हिस्सा है। आस्ट्रेलिया में कुल सम्पति के 28 प्रतिशत पर धन कुबेरों का आधिपत्य है, इसके बाद अमेरिका एवं ब्रिटेन भी समानता वाले देशों में है, इनमें कुल सम्पति के क्रमशः 32 प्रतिशत एवं 35 प्रतिशत पर धनाढ्य लोगों का कब्ज़ा है। संपत्ति के आधार पर देशों में असमानता वाली यह जानकारी hindi.cobrapost.com में दर्शाई गई है। 
संपत्ति में असमानता की दृष्टि से भारत दूसरा बड़ा राष्ट्र है जहाँ सम्पति की दृष्टि वाली इस असमानता को एक दिन में नहीं सुधारा जा सकता। जापान एवं आस्ट्रेलिया जैसी धन की समानता वाली स्थिति में लाने के लिए भी सरकार को बिना भेद भाव के ऐसे कई कड़े निर्णय लागू करने पड़ेंगे। कड़े निर्णय लेना और उनको दृढता से लागू करना, दो अलग अलग पहलू हैं। पहले यह सोचना कि निर्णय कैसा है, इसके दूरगामी परिणाम क्या क्या हो सकते हैं, दूसरा इसको कैसे लागू किया गया है, इसमें क्या चूक थी जिसकी वजह से जो संभावित लाभ थे वे एकदम से नहीं मिल पाए हैं या भविष्य में संभावित तिथि से कितने दिन बाद तक प्राप्त हो पाएंगे। ये दोनों बातें अलग अलग है।
नोटबंदी का यह निर्णय नि:संदेह ऐसा निर्णय है जो अत्यंत कड़ा अवश्य है किंतु इसका फल ठीक वैसे ही है, जैसे कोई खाने की कड़वी ऐसी चीज जो खाने में बेहद कड़वी अवश्य होती है किन्तु पेट एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत गुणकारी एवं स्वस्थकारक सिद्ध होती है। इस साहसिक निर्णय की जितनी सराहना की जावे, वह कम ही कहलाएगी, क्योंकि इसके दूरगामी परिणाम इतने सुंदर होंगे, जिसकी हम अंशतः ही कल्पना कर पा रहे हैं।
नोटबंदी के पक्ष में मेरे ही ऐसे विचार हों, ऐसा मैं नहीं सोचता हूँ, यदि इस सम्बन्ध में अब तक हुए सबसे बड़े सर्वे के आंकड़ों को भी देखा जावे तो उससे भी प्रतीत होता है कि लाख तकलीफों के बावजूद भी ज्यादातर लोग मोदी जी के साथ खड़े है। यह सर्वे भी उस दौरान का है जब नोटबंदी लागू हुए कुछ ही दिन बीते थे और लोगों की परेशानियां बढ़ रही थी। इनसॉर्ट द्वारा ग्लोबल मार्केट रिसर्च कंपनी IPSOS की मदद से किए गए इस सर्वें में 82 फीसदी लोगों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नोट बंदी के फैसले को सही ठहराया था। यानी 2014 के लोकसभा चुनाव से भी बड़ा जनसमर्थन उन्हें इस मसले पर  मिलता हुआ नजर आ रहा था। सर्वे में जबकि 84 फीसदी जनता का मानना है कि काले धन को लेकर केंद्र सरकार वाकई गंभीर है। ग्लोबल मार्केट रिसर्च कंपनी IPSOS के सर्वे से पता चला है कि युवा भारत मोदी के समर्थन में खड़ा है। सिर्फ यंग इंडिया ही नहीं बल्कि अर्बन इंडिया ने भी ब्लैक मनी को लेकर सरकार की स्ट्रैटजी की सराहना की है। ये सर्वे करीब पांच लाख लोगों की राय पर आधारित था और उसमें भी करीब 80 फीसदी लोगो की उम्र 35 साल से कम थी। ऐसे में सर्वे के निष्कर्ष बतातें है कि देश का युवा और मेट्रो सिटी में रहने वाले लोग इस बात को मानते है कि काले धन और भ्रष्टाचार को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की जो रणनीति है वो काफी बेहतर हैं। उसकी सराहना की जा रही हैं। देश की जनता इस बात को भी मान रही है कि उन्हें तकलीफ हो रही है, लेकिन ब्लैक मनी और भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए वो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ खडी नजर आ रही है। यद्यपि यहाँ यह कहना उचित होगा कि किसी भी सर्वें को समस्त जनता की राय नहीं माना जा सकता है, यह एक संकेत भर होता है, एक अनुमान होता है, यह पूर्ण सत्य को भी दृष्टिगोचर कर सकता है और नहीं भी, क्योंकि  इसमें कुछ लोगों से ही रायशुमारी की जाती है। सर्वे की यह रिपोर्ट indiatrendingnow.com से ली गई है, सर्वे के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी इस साईट पर विजिट करके भी देखी जा सकती है। कुछ लोगों पर किए गए इस सर्वे के आंकड़ों से या मीडिया में दिखाई दे रहे लेखों से या विभिन्न इंटरव्यूज में, मोदी जी के इस निर्णय की सराहना ज्यादा आलोचना कम दिखाई दे रही है और अब जब 9 नवम्बर से पहले के लेनदेन को भी सामने लाने की पहल सम्बंधित विभाग द्वारा कर दी गई है, तो इस विषय पर आलोचना के लिए आलोचकों के पास कुछ विशेष नहीं रहा है।